रविवार, 28 सितंबर 2014

पल्टू दा पी सी ओ:आरसी चौहान


                          आरसी चौहान

पल्टू दा पी सी

मजदूर क्या होते हैं?
उनकी विवाई कहां फटती है
पल्टू दा से अधिक कोई
क्या बता सकता है ?
कभी मजदूरों में
रीढ़ की हड्डी रहे पल्टू दा
जब निकाले गये काम से
टूटे हुए बाल की तरह
उलझ कर उलझते चले गय
राजनीति के कंघे में
नहीं आया काम
मजदूर संगठनों का मरहम
भागदौड़ की रेलम पेल में
हार पाछकर लौट आये घर पल्टू दा
परिवार में छा गया घुप्प अन्हार
और गांव में पसर गयी
अन्हार की छाया
हार नहीं मानी पल्टू दा ने
आशा के सहारे
हिम्मत के चबूतरे पर
खोल ली एक गुमटी में
पल्टू दा पी सी
गांव में दस मुंह दस बातें
सबकी सुनकर
बेखबर रहे पल्टू दा
समय की पीठ पर सवार
चल निकला पल्टू दा पी सी
सुबह से शाम तक
हाय, हैलो में डूबे रहे पल्टू दा
फिर तो
धीरे धीरे चेहरा पढ़ने का अनुभव
हासिल कर लिया उन्होंने
किसी चेहरे की मुस्कान
और बुझे चेहरे की थकान से
निकाल लेते कई कई अर्थ
मसलन जवान होती लड़की की
मुस्कान की लम्बाई से
अनुमान लगाते उसके रहस्यमयी प्रेम की
जिसकी पंखुड़ियां अभी खुली नहीं हैं
ठहाके से
उसके बेशर्मीपन की
और रोने पर देखते
उसके भावनाओं के समन्दर में
डूबता उतराता सपना
सांय सांय बतियाने पर लगाते
किसी अनहोनी घटना का अनुमान
बात करते- करते फफक कर रोने पर
अंदाजा लगाते
उसके साथ हुई किसी
जोर जबरदस्ती की
और अब जब पूरे अरियात करियात में
किसी अनोखी घटना से
कम नहीं था
पल्टू दा पी सी
फिर एक दिन हुआ यूं कि
फोन की घंटी
बज रही थी ट्रिंग ट्रिंग
और लोगों का हुजूम

बढ़ रहा था लगातार


संपर्क   - आरसी चौहान (प्रवक्ता-भूगोल
राजकीय इण्टर कालेज गौमुख, टिहरी गढ़वाल उत्तराखण्ड 249121  
 मोबा0-08858229760 ईमेल- chauhanarsi123@gmail.com